Short Essay on Baisakhi in Hindi – प्रमुख त्यौहार बैसाखी पर हिन्दी में निबन्ध

By | June 8, 2020

Short Essay on Baisakhi in Hindi – सिखों का एक प्रमुख त्यौहार बैसाखी पर हिन्दी में निबन्ध, कक्षा 6,7,8,9,10 तक के बच्चों को आये दिन स्कूल से निबन्ध लिखने को मिलते रहते है ऐसे में अभिवाहक लोग बैसाखी पर हिन्दी में निबन्ध से जुडी जानकारी नेट पर सर्च करते है इस पोस्ट में हमने सभी के लिए बैसाखी पर निबन्ध लिखा है जो आपके की हेल्प करेगा।

Short Essay on Baisakhi in Hindi – 2021

Essay on Baisakhi in Hindi

भारत एक ऐसा देश है जिसको त्यौहारों का देश भी कहा जाता है यहाँ पर कई धर्मो के लोग रहते है। सभी धर्मों के लोगों के अपने – अपने त्यौहार होते है कहाँ जाता है यहाँ हर दिन किसी न किसी धर्म के त्यौहार होते है। ऐसे में बैसाखी भी एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है यह सिखों का त्यौहार होता है इस दिन सिख धर्म के लोग इस त्यौहार को बड़ी धूम धाम से मानते है। खेतो मे रबी की फसल पक कर लहलहाती है, किसानो के मन मे फसलों को देखकर खुशी रहती है, तो वे अपनी इसी खुशी का इजहार इस त्यौहार को मनाकर करते है।

बैसाखी सिखों का एक प्रमुख त्यौहार होता है जो भारत के पंजाब प्रान्त में मनाया जाता है। इसको कई लोग लोहड़ी के नाम से भी जानतें है। इस दिन सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है, इसलिए ये त्यौहार मनाया जाता है। मान्यता है की सन 1699 मे इसी दिन सिक्खो के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिह ने सिक्खो को खालसा के रूप मे संगठित किया था यह भी के बहुत बड़ा कारण है इस त्यौहार को मानने का। इस त्यौहार की तैयारी भी भारत के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली की तरह ही किया जाता है। इस दिन सिख लोग अपने घरों की सफाई करते है, आगन को रंगोली और लाइटिंग से सजाते है, घरो मे पकवान बनाते है. इस दिन पवित्र नदियों का स्नान करना अच्छा माना जाता है। स्नान करने के बाद सिख लोग गुरुद्वारे जाते है।

इस दिन गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ का पाठ किया जाता है, कीर्तन आदि भी करवाए जाते है नदियों के किनारों पर मेले का आयोजन किया जाता है लोग बड़ी धूमधाम से मेले का आनन्द लेते है। पंजाबी लोग इस दिन अपनी खुशी को अपने विशेष नृत्य भांगड़ा के द्वारा भी व्यक्त करते है, बच्चे, बूढ़े, महिलाए सभी डोल की आवाज मे मदमस्त हो जाते है और हर्षो उल्लास से नाचते गाते है।

बैसाखी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

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बैसाखी का इतिहास ?

इस त्यौहार को मनाये जाने के पीछे कई सारी मान्यताएं है कुछ के बारे में जानकारी…

सन 1699 की बात है, सिक्खो के गुरु, गुरु गोबिन्द सिह जी ने सभी सिक्खो को एक जगह पर आमंत्रित किया, गुरु की आज्ञा पाते ही सभी सिख आनंदपुर साहेब मैदान मे एकत्रित होने लगे थे। गुरु के मन मे अपने शिष्यो की परीक्षा लेने की इच्छा उत्पन्न हुई, गुरु ने अपनी तलवार को कमान से निकालते हुये कहा कि मुझे सिर चाहिए? इस पर कई भक्त शिष्य अपने अपने जीवन का बलिदान दिया था।

मगर गुरु ने उन सबकी परीक्षा ली थी वो सब अपनी परीक्षा में पास हो गए थे, उसके बाद गुरु ने इस प्रकार इन पाच लोगो को अपने पाच प्यादो के रूप मे परिचित कराया, तथा इन्हे अमृत का रसपान कराया और कहा कि आज से तुम लोग सिख कहलाओगे और उन्हे बाल और दाढ़ी बढ़े रखने के निर्देश दिये, आत्म रक्षा के लिए कृपाण रखे, कच्छा धारण करे, तथा हाथो मे कडा पहने. गुरु ने अपने शिष्यो को निर्बलों हाथ न उठाने के निर्देश दिये, इस घटना के बाद से ही गुरु गोबिन्द राय, गुरु गोबिन्द सिह कहलाये और सिख्को के नाम के साथ भी सिह शब्द जुड़ गया और यह दिन भी खास हो गया।

इस त्यौहार से जुडी दूसरी जानकारी पाण्डवों से जुडी बताई जाती है बताया जाता है महाभारत में पाडवों ने जब अपना बनवास के समय पंजाब के कटराज ताल पहुचे, तो उन्हे बड़ी जोरों की प्यास लगी, उस समय युधिष्ठिर ने अपने भाई से बोला की अनुज यहाँ कहीं पानी मिलेगा? तो इस पर उनके भाइयों में से किसी ने कहाँ की हम अभी पानी लेकर आते है फिर वो पानी लेने चले गए कुछ दूर जाने के बाद उनको एक सरोवर दिखाई दिया।

सरोवर में से एक आवाज आयी ठहरों मेरे सवालों के जबाब दिए बिना आप मेरे सरोवर का जल नहीं पी सकते या ले जा सकते तब यक्ष की बात न मानकर युधिष्ठिर के भाई ने जल पीना शुर कर दिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी ऐसे करके युधिष्ठिर के सभी भाई जल लेने गए और सरोवर के किनारे मृत्यु को प्राप्त हो गए।

उसके बाद युधिष्ठिर खुद गए और फिर उन्होंने देखा की उनके सभी भाई जमीन पर गिरे है फिर उन्होंने सोचा की कहीं सरोवर का जल ही तो विषैला नहीं है फिर उन्होंने भी जल को पीने का प्रयास किया तब जल से एक आवाज आयी, मेरे प्रश्न का उत्तर दिए बिना आप मेरा जल ग्रहण नहीं कर सकते फिर युधिष्ठिर ने यक्ष के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए, यक्षराज युधिष्ठिर के उत्तर से बहुत प्रसन हुए और उनके सभी भाईयों को पुनः जीवित कर दिया। तब से ही इस दिन पवित्र नदी के किनारे विशाल मेला लगता है और जुलूस भी निकलता है और जुलूस मे पाच प्यादे नंगे पाव सबसे आगे चलते है और बैसाखी का त्योहार उत्साह से मनाया जाता है।

बैसाखी पर्व का महत्त्व – बैसाखी का पर्व सिख किसानो का प्रमुख त्योहार होता है, इस दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देते है। यही इस त्यौहार का सबसे अच्छी महत्वपूर्ण अंग है।

बैसाखी पर्व कब मनाया जाता है? (Short Essay on Baisakhi in Hindi)

वैसे तो यह त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाता है क्योंकि सिख भाई लोग पूरे भारत में रहते है, लेकिन पंजाब और हरियाणा में यह त्यौहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। मुख्यता यह त्यौहार पंजाब राज्य का है और यहीं पर इसको सबसे अच्छे तरीके और धूम से मनाया जाता है। इस त्यौहार के समय देश दुनिया में बसे सभी सिख भाई लोग अपने गांव पंजाब आते है और इस त्यौहार को बड़ी ही धूम – धाम से मानते है। बैसाखी का पर्व इस साल Wed, 14 April  2021 को मनाया जायेगा। आशा करते है कि आपकी बैसाखी शुभ और मंगलमय हो

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