Parishram Ka Mahatva Essay In Hindi – परिश्रम का महत्व पर निबंध

Parishram Ka Mahatva Essay In Hindi – परिश्रम का महत्व पर निबंध

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Parishram Ka Mahatva Essay In Hindi –

आज के समय में कठिन परिश्रम का महत्व बहुत ही अधिक है। आज के समय में कोई भी काम बिना परिश्रम के नहीं होता है। परिश्रम एक ऐसी पूंजी है जिसके दम पर दुनिया में कुछ भी पाया जा सकता है एक समय ऐसा था जब लोग अपनी परिश्रम के बल पर भगवान को भी प्राप्त कर लेते थे। इस संसार में जो भी आया है उसको परिश्रम जरूर करना पड़ता है चाहे वो मानव हो या जीव-जंतु, सभी को परिश्रम करना ही पड़ता है।

मनुष्य के परिश्रम की दुनिया में आज बहुत बड़ी-बड़ी मिसालें है जो सोचने से भी बहुत अधिक कठिन लगती है मगर मानव अपने परिश्रम से ही दुनिया में आज ऐसी ऐसी सुबिधा बना दिया है जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की गयी थी। मनुष्य के मेहनत का ही फल है की आज दुर्गम पहाड़ियों में भी यातायात के अच्छे – अच्छे साधन सुलभ हो सके है। पर्वतों को काटकर सडकों का निर्माण करना, नदियों और समंदर पर पुल बनाना, जिन रास्तों पर काँटे होते हैं उन्हें वह सुगम बनाना, समंदर की छाती को चीरकर आगे बढ़ना, दुनिया में बड़ी – बड़ी इमारतों का निर्माण अंतरिक्ष, चाँद और सूरज तक जाने की योजना बनाना, कुछ देशों का वहां तक पहुंच भी जाना ये सब परिश्रम के ही फल है जो पूरी दुनिया में लोगों द्वारा किये जा रहे है।

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जो लोग भाग्य के भरोसे रहते है उनका जीवन बस भाग्य तक ही सिमट कर रह जाता है जो जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते, भाग्य के भरोसे रहने वाले लोगों में आलस्य पैदा हो ज्यादा है जो उनको कभी भी आगे नहीं बढ़ने देता है। यही कारण है की जो लोग ऐसा करते है वो सफल नहीं हो पाते है। क्योंकि विधाता ने ये जीवन परिश्रम करने के लिए बनाया है। यही एक ऐसी पूंजी है जो किसी की भी दुनिया बदल सकती है। उदहारण के लिए धीरू भाई अम्बानी को ही ले लीजिये वो एक समय था की किसी पेट्रोल पंप पर काम करते थे, अपनी मेहनत और लगन से धीरू भाई ने एक ऐसी दुनिया बना दी जिसका आज पूरी दुनिया गुणगान करती है। ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो परिश्रम से सफल न हो सकें।

वास्तव में बिना श्रम के मानव जीवन की गाड़ी चल नहीं सकती है। श्रम से ही उन्नति और विकास का मार्ग खुलता है। परिश्रम और प्रयास ये दो ऐसे स्तब्ध है जो किसी भी ब्यक्ति को दुनिया में शिर्ष स्थान पर ले जा सकते है इसका सबसे बाद उदहारण वर्तमान प्रधानमंत्री है जिन्होंने अपनी मेहनत के बल पर एक छोटे से गांव से इतने बड़े देश के प्राइम मिनिस्टर तक का सफर पूरा किया है और दुनिया में अपना नाम कमाया। अगर मनुष्य परिश्रम नहीं करता तो आज संसार में कुछ भी नहीं होता, सब परिश्रम का ही परिणाम है।

परिश्रम का महत्व (Importance Of Hard Work) –

  • परिश्रम करने से किसी भी ब्यक्ति की उन्नति और विकास पूरी तरह से होता है।
  • परिश्रम ही एक ऐसी पूंजी है जिसपर कोई भी देश उन्नति और विकास करता है।
  • परिश्रम से ही विकास की रचना होती है।
  • जिन व्यक्तियों के जीवन में आलस भरा होता है वे कभी भी जीवन में उन्नति नहीं कर सकते हैं।
  • मनुष्य ने परिश्रम से अपने जीवन को उन्नति और विकास किया है।

parishram ka mahatva story in hindi,- जिस तरह से बिल्ली के मुंह में चूहे खुद ही आकर नहीं बैठते है उसी तरह से मनुष्य के पास बिना परिश्रम के उन्नति और विकास खुद ही नहीं हो जाते हैं। परिश्रम के बिना कभी भी मनुष्य का काम सफल नहीं हो सकता है। जब कोई किसी काम के लिए परिश्रम करता है तभी जाकर उसको उस काम में सफलता मिलती है।

परिश्रम के लाभ – (Benefits of Hard Work) –

  • परिश्रम करने वाले का जीवन गंगाजल की तरह निर्मल रहता है।
  • जो मनुष्य परिश्रम करता है उसके मन से वासनाएं और अन्य प्रकार की दूषित भावनाएँ नहीं आती है।
  • बेकार की बातों के लिए समय नहीं होता है।
  • शरीर हष्ट-पुष्ट रहता है।
  • मनुष्य का शरीर रोगों से मुक्त रहता है।
  • जीवन में विजय और धन दोनों ही मिलते हैं।
  • भाग्य पर निर्भर नहीं रहते हैं
  • जीवित रहते हुए भी यश मिलता है
  • परिश्रमी व्यक्ति ही अपने राष्ट्र और देश को ऊँचा उठाने के लिए काम करते रहते है।
  • किसी भी शक्तिशाली देश का आसानी से सामना करने में सक्षम होना यह भी एक बहुत बड़ा लाभ है।

महापुरुषों के उदाहरण – अब्राहिम लिकंन ने एक गरीब मजदूर परिवार से तालुक रखते थे, बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था लेकिन फिर भी वे अपने परिश्रम के बल पर एक झोंपड़ी से से निकलकर अमेरिका के राष्ट्रपति भवन तक का सफर पूरा किया, ये परिश्रम का ही फल था।

अपने देश के प्रधानमंत्री हो ही ले लीजिये, इनका जीवन भी बहुत परिश्रम के साथ बिता है तब जाकर ये आज PM Modi कहें जाते है, संघर्ष और परिश्रम का उदहारण है मोदी जी का जीवन हमें इनके जीवन और इनके संघर्षों से सिख लेनी चाहिए, और खूब मेहनत करके अपने जीवन को अच्छा बनाना चाहिए।

लाला बहादुर शास्त्री , महात्मा गाँधी और सुभाष चन्द्र जैसे महापुरुषों ने अपने परिश्रम के बल पर भारत को स्वतंत्र कराया था।

डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्ण जी अपने परिश्रम के बल पर ही राष्ट्रपति बने थे।

ये सभी लोग अपने अकेले के परिश्रम से ये सब दुर्लभ काम किये थे और दुनिया में अपना नाम कमाकर अमर हो गए, आज भी दुनिया में ऐसे लोगों का नाम समय – समय पर लिया जाता है। यही होती है मेहनत की पूंजी अगर मेहनत करोगे तो कभी नहीं कभी सफलता जरूर मिलेगी मगर मेहनत ही नहीं करोगे तो कैसे जानोगे की सफलता क्या होती है इसलिए भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए काम करते रहो फल तो देने वाला देगा ही आज नहीं तो कल सफलता जरूर मिलेगी।

आलस्य से हानियाँ –

  • आलस्य से जीवन अभिशाप बन जाता है।
  • अलसी व्यक्ति ही परावलम्बी होता है।
  • अलसी व्यक्ति पराधीनता से मुक्त नहीं हो पाता है।
  • देश के व्यक्तियों में आलस और हीन भावना का होना अच्छे संकेत नहीं माने जाते है।

अगर विद्यार्थी परिश्रम ही नहीं करेगा तो वह परीक्षा में कभी भी सफल नहीं हो सकता है। मजदूर भी परिश्रम से ही संसार के लिए उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करता है, कवि और लेखकों ने परिश्रम के बल पर अपनी रचनाओं से देश को वशीभूत किया है।

उपसंहार – जो परिश्रमी होते हैं वे चरित्रवान, ईमानदार, और स्वावलम्बी होते हैं। अगर हम अपने देश और राष्ट्र की उन्नति चाहते हैं तो आपको भाग्य पर निर्भर रहना छोडकर परिश्रमी बनना सीखें। यही हमारे जीवन के लिए सबसे अच्छा होता है।

आज हमारे देश में बेरोजगारी इतनी तेजी से बढ़ रही है जिसका एक कारण आलस्य भी हो सकता है। परिश्रम से किसान जमीन को सोना बना देता है वो दिन रात मेहनत करके अपने कृषि की भूमि को ऐसा बना देता है की वो भूमि उसको सोने जैसे भाव देने लगती है। इसलिए कहा जाता है की हमको मेहनत जरूर करनी चाहिए। यही सफलता की कुंजी है।

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