Intolerance Essay In Hindi – असहिष्णुता पर लेख [नया शब्द]

Intolerance Essay In Hindi – असहिष्णुता पर लेख [नया शब्द]

असहिष्णुता Intolerance किसी अन्य जाति, धर्म और परंपरा से जुड़े लोगों या ब्यक्तियों के विश्वासों, व्यवहार व प्रथा को मानने की अनिच्छा हैं। यह समाज में नफरत, अपराधों और भेदभावों को जन्म देने वाला शब्द है जिसका जन्म पिछले कुछ सालों में हुआ जब मोदी सरकार आयी थी उसके कुछ वर्षों बाद ही लोगों ने सरकार के खिलाफ अनिच्छा जतायी थी, इसको लेकर माहौल इतना ख़राब हो चूका तो की लोग अपने अवार्ड तक वापस करने लगे थे बाद में उनको समझा कर सरकार ने इस मामले को शांत करवाया था सरकार ने उनको यह विश्वास दिलाया था की देश में सब कुछ अच्छा है किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है तब जाकर लोग इस मामले को शांत किये नहीं तो देश में हर जगह असहिष्णुता Intolerance की ही चर्चा होती थी।

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असहिष्णुता Intolerance लोगों को एकता, बिना भेदभाव, स्वतंत्रता और अन्य सामाजिक अधिकारों से जीने की अनुमति नहीं देता। किसी समाज में इसका जन्म जाति, संस्कृति, लिंग, धर्म और अन्य असहनीय कार्यों के द्वारा ही होता है।

असहिष्णुता पर छोटे-बड़े निबंध (Short & Long Essay on Intolerance in Hindi)

प्रस्तावना – असहिष्णुता Intolerance को हम आमतौर पर एक शर्त की तरह देखते है जैसे किसी अन्य धर्म, जाति या संस्कृति की प्रथाओं और मान्यताओं को न मनना, संयुक्त राष्ट्र में आयोजित बहुसंस्कृतिवाद सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिभागियों से पूछा गया कि, “हम उनके लिये कैसे सहिष्णु बने जो हमारे लिये असहिष्णु हैं?” तो उनका जबाब था भी बुरे हालातों में कोई एक असहिष्णुता के वातावरण का निर्माण करता हैं। सहिष्णुता उन लोगों का अभिन्न गुण हैं जो विभिन्न समूहों के होते हुये भी एक-दूसरे से सम्मानपूर्वक और समझदारी से जुड़े हुये हैं।

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भारत में असहिष्णुता क्या हैं?

असहिष्णुता Intolerance का सही मतलब होता है असंतोष, हम ये नहीं कह सकते कि भारत में असहिष्णुता हैं मगर बीते कुछ वर्षों ने भारत में भी इस शब्द का खूब इस्तेमाल किया गया। भारत में जाति, पंथ, धर्म, रिवाज, संस्कृति, परंपरा और प्रथा को मानने वाले वर्षों से बिना किसी भेदभाव के रह रहे हैं। वो एक दूसरे के धर्म, रिवाज, विश्वास. मान्यता और प्रथा की सही समझ रखते हैं। इसलिए हम कह सकते है की भारत में असहिष्णुता Intolerance नहीं है।

एक समय था जब यह मामला बहुत तेजी से तूल पकड़ रहा है उस समय बॉलीवुड अभिनेता, आमिर खान ने भी कह दिया था देश में असहिष्णुता Intolerance का माहौल है। उनके इस बयान से देश की जनता बहुत ही आश्चर्य में आ गयी थी की इतने बड़े स्टार ने ऐसी बात कह डाली। भारत वो देश हैं जहाँ कोई भी ये आरोप नहीं लगा सकता कि लोग असहिष्णुता को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि यहाँ सभी लोग एक दूसरे के धर्म और प्रथा को समझते है और उसका सम्मान करते है।

असहिष्णुता समाज को कैसे प्रभावित करती हैं?

असहिष्णुता (मुख्यतः धार्मिक असहिष्णुता) समाज में रहने वाले लोगों के बीच विभाजन को जन्म देती है। जिससे किसी भी राष्ट्र का बिभाजन भी हो सकता है यह किसी भी देश और समाज के लिए अच्छा नहीं होता है। विभिन्न जाति, धर्म, मान्यताऔं और प्रथाओं के लोगों के बीच असम्मान, शत्रुता और युद्ध की स्थिति हालत ये शब्द बनाते है इसलिए किसी भी देश के लिए ऐसे शब्द अच्छे नहीं होते है हर देश को ऐसी चीजों से बचना चाहिए।

असहिष्णुता की स्थिति आर्थिक मंदी और राजनीतिक स्थिति में बदलावों के कारण विभिन्न समूह के लोगों में देखने को मिल रही है आज पूरी दुनिया में लोग इसपर बिचार भी कर रहे है की आखिर क्या वजह है की समाज ऐसे हो रहे है लोग में इस तरह की भावना कैसे पनप रही है आखिर इसके क्या कारण हो सकते है ऐसी चीजों पर पूरी दुनिया में लोग बिचार कर रहे है।

असहिष्णुता किसी भी राष्ट्र की एकता से अलगाव हैं जो नापसंद, इंकार और लोगों के बीच झगड़ों की स्थति को उत्पन्न करता हैं।

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असहिष्णुता आने का कारण –

बुरी शिक्षण प्रणाली
दूसरी संस्कृति के खिलाफ बर्बर
धर्म, समुदाय के लोगों के विचारों, विश्वासों, मान्यताओं और प्रथाओं में गड़बड़ी के बिचार
धार्मिक, सांस्कृतिक, परंपराओं, रीति-रिवाजों और लोगों के विचारों में मतभेद के कारण
विभिन्न समुदायों से संबंध
उच्च स्तर की विनाशकारी शक्ति
मीडिया को भी सांस्कृतिक संवेदनशीलता के प्रति सहिष्णुता की भावना…

Intolerance Quotes in Hindi

असहिष्णुता किसी भी देश को विनाश की राह पर ले जा सकती है।
जिस देश के लोगों में असहिष्णुता जैसी भावना होती है वह देश आगे नहीं बढ़ सकता।
हम सभी को अलग अलग समुदायों, जाति, धर्म के लोगों की रिस्पेक्ट करना चाहिए, उनकी भावनाओं को समझना चाहिए।
असहिष्णुता एक ऐसी स्थिति होती है जो किसी भी देश और समाज को खतरे में डाल सकती है।
एक देश के विकास के लिए जहां सहिष्णुता बहुत ही जरूरी होती है वहीं असहिष्णुता देश के विघटन में भूमिका निभाती है।
कभी-कभी असहिष्णुता देश में एक ऐसा माहौल बना देती है जिसमें इंसान इंसान का ही दुश्मन बन जाता है
असहिष्णुता आज के समय में पूरी दुनिया के लिए एक समस्या बनती जा रही है।
किसी भी देश को आगे बढ़ना है तो उसको असहिष्णुता जैसी चीजों से दूर रहना होगा।

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