Gramin Jeevan Samasya Essay Lekh In Hindi – ग्रामीण जीवन की समस्या पर लेख

Gramin Jeevan Samasya Essay Lekh In Hindi – ग्रामीण जीवन की समस्या पर लेख or Nibandh

हमारा देश गावों का देश कहा जाता है यहाँ की 70% आबादी आज भी गावों में निवास करती है। जब हम Gramin jeevan ki samasya in hindi लेख पर बात कर ही रहे है तो यह जानना जरुरी हो जाता है की आखिर गांव क्या होते है? कुछ लोगों का एक समूह जो एक निश्चित छोटे स्थान या बस्ती में रहता है, वहीँ गांव कहलाता है। हमारा भारत देश एक विशालकाय देश है जिसमे लगभग 135 करोड़ की आबादी है, हमारे यहाँ गावों की संख्या भी कई लाख है एक अनुमान में मुताबिक भारत में इस समय कुल 5-6 लाख गावं हो सकते है। आबादी में बारे में कहें तो हम दुनिया में चीन के बाद दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में जाने जाते है आने वाले कुछ ही दिनों में 2030 तक भारत जनसख्या में मामले में दुनिया का नंबर देश बन जायेगा। वैसे तो ये ठीक नहीं है क्योंकि जनसख्या का ज्यादा होना किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं होता है।

Gramin Jeevan ki Samasya Essay in Hindi

Gramin jeevan ki samasya in hindi

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जिसके बारे में कहा जाता है की भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा किसान है। गांव कृषि पर ही निर्भर है कृषि ही इनका प्रमुख व्यवसाय है जिससे किसानों का जीवन यापन होता है, ये किसान ही होते है जो पूरी दुनिया के लिए भोजन की ब्यवस्था करते है मान लीजिये अगर किसान न हो तो क्या कोई ब्यकित पैसा खा सकता है? इसलिए किसी भी देश के लिए किसान और गावों का होना बहुत ही जरुरी होता है अगर ये नहीं तो कुछ नहीं।

भारतीय गांव – हमारे देश को गावों का देश कहा जाता है, ये तरह से देखें तो यह सही भी है क्योंकि यहाँ की ज्यादातर आबादी आज भी गावों में ही निवास कर रही है अब जाकर कुछ लोग शहरों की तरफ अपना रुख कर रहे है। सादा जीवन उच्च विचार यही भारतीय ग्रामों की पहचान है। खेतों में दूर-दूर तक लहलहाती हुई हरी फसले, कड़ी धूप और खुले आसमान के नीचे काम करता किसान, घरो की बागदौड़ संभालती घर की स्त्रियों की छवि आखों के सामने आ जाती है।

पेड़ों की ताजी – ताजी हवाएँ मन को बहुत भाति है , यहाँ हम एक मूवी की लाइन से अपने देश को परिभाषित कर सकते है “ऐसा देश है मेरा ” मुक्त ताजी-ताजी सब्जियाँ, गाँवो के चौपालों की रौनक आज भी मन को मोह लेती है मन करता है कुछ गावों में जाकर जीवन बिताया जाय। गावों में एक दूसरे का आपस में लगाव देखकर आज भी मन बहुत खुश हो जाता है।

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ग्रामीण जीवन की विशेषताएँ –

कृषि पर आधारित – भारतीय गावों में आज भी लोग कृषि पर ही आधारित है यहीं उनके आजीविका का मुख्य साधन होता है, कृषि ही लोगों का प्रमुख व्यवसाय है।
संयुक्त परिवार – जहाँ शहरों में आज लोग अलग – अलग रहने का प्रचलन बना लिए है वहीँ गावों में आज भी लोग एक साथ रहते है कई परिवारों में तो आज भी सदस्यों की संख्या लगभग 50 तक है वो सभी लोग एक साथ ही रहते है।
जाति भेद – गावों में जाति का भेदभाव बहुत कम रह गया है लोग आपस में मिलजुलकर अपना जीवन यापन करते है।
पंचांग का उपयोग – गावों में इसका काफी महत्व है लोग पंचांग देखकर ही कोई शुभ काम करते है या अपने त्योहारों को मनाते है।
सादा जीवन – गावों में लोग सादा जीवन जीते है वो महगें ब्रांडेड कपडे नहीं पहनते है उनका मानना है सादा जीवन सबसे अच्छा जीवन होता है, मानव का बिचार सबसे अच्छा होना चाहिए बाकि सब चीजें इतना महत्व नहीं रखती है।
मंद गति से विकास – आज भी जहाँ शहरों में इतना तेजी से हर सेक्टर में विकास हो रहा है गावों में उतना नहीं हो पता है।
गरीबी – जिस किसान की बदोलत पूरा देश अपना पेट भरता है उसी किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य सरकार नहीं दिलवा पाती है जिससे किसान बिचौलिए के प्रभाव में आकर अपनी फसल को औने पौने दामों में बेच देता है जिससे वो हमेशा गरीब बना रहता है।
अशिक्षा – आज हमारा देश शिक्षा के सेक्टर में इतना आगे हो गया है की विदेशों से भी लोग भारत में शिक्षा लेने आ रहे है मगर गावों में आज भी वो ब्यवस्था सरकार नहीं कर पायी की वहां के लोग भी अपने बच्चों को एक अच्छे स्कूल में शिक्षा दिलवा सके जो स्कूल है भी वो इतने महंगे है की किसान का बेटा उसमे शिक्षा नहीं ले सकता।

अब गावों में रहने लोग समय के साथ अपनी धारणा बदल रहे है और शहरों की तरफ अपना रुख कर रहे है। गाँव के लोग ग्रामीण असुविधा से तंग आकर शहरी सुविधा से आकर्षित हो रहे है, और शहरों में अपना निवास बनाकर सुविधा तलाश रहे है। ग्रामीण जीवन की समस्याओ को समझने के लिए कुछ बिन्दुओ पर ध्यान देते है।

ग्रामीण जीवन की समस्याएँ (Gramin Jeevan ki Samasya) –

ग्रामीण असुविधाएँ – हर छोटी से छोटी जरूरत के लिये शहर आना पड़ता है
शिक्षा का अभाव – आज भी कई गाँवो में स्कूल नहीं है और अगर स्कूल है भी तो उनमें शिक्षा का स्तर और व्यवस्थाए सही नहीं है।
विकास की धीमी रफ्तार – गावों में विकास की तपतार शहरों की अपेक्षा कम है, यह भी एक समस्या है।
स्वास्थ की सम्पूर्ण सुविधा उपलब्ध न होना – अच्छी स्वास्थ सेवाएं आज भी गावों में उपलब्ध नहीं हो सकी है।
मौसम की मार – असमय मौसम और मानसून की मार भी एक समस्या बना है।
अवैधानिक तत्वो की मौजूदगी – गाँवो में आज भी जुआ सट्टा और मादक पदार्थो की बिक्री खुलेआम जारी है।
परिवहन के साधनों का अभाव – आज भी गावों में परिवहन की अच्छी सुबिधा सरकारें मुहैया नहीं करवा पा रही है।
भौतिक सुख सुविधाओ का अभाव – किसानों की आमदनी कम होने से लोग ऐसी सुबिधा का लाभ गावों में नहीं ले पा रहे है।
मनोरंजन के साधनों का अभाव – सिनेमाघर, गार्डन, चौपाटी जैसी चीजों का गावों में आज भी बहुत अभाव है।

ग्रामीण जीवन के लाभ/फायदे (Gramin Jeevan ke Labh) –

शुद्ध रसायन मुक्त भोजन – गावों में आज भी अच्छा भोजन बनता है बिलकुल रसायन मुक्त होता है।
शुध्द प्रकृतिक वातावरण – गावों का वातावरण आज भी शहरों की अपेक्षा अच्छा होता है।
त्योहारों का सही आनंद – त्योहारों का सही आनंद आज भी गावों में ही देखने को मिलता है।
एक दूसरे की मदद के लिये सदैव तत्पर – गावों में आज भी लोग एक दूसरे की मदत के लिए हमेशा तैयार रहते है।
शहरी भागदौड़ से दूर सुकून की ज़िंदगी – जहाँ बड़े-बड़े शहरों में लोग भाग दौड़ से तंग आ चुके है, वही ग्रामीण जीवन आज भी बहुत सकून भरा है।

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