Essay on National Flag in Hindi – राष्ट्रीय ध्वज पर हिन्दी में निबंध

By | June 11, 2020

Essay on National Flag in Hindi – राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध – राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) इतिहास व महत्त्व पर निबंध

कक्षा 3,4,5,6,7,8,9,10 तक के बच्चों को essay on national flag in Hindi का महत्व पर निबंध

Essay on National Flag in Hindi – राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध –

Essay on National Flag in Hindi

राष्ट्रीय ध्वज किसी भी देश की स्वाधीनता का प्रतीक होता है। देश में अपना ध्वज लहराने का मतलब ही होता है की वो देश स्वतंत्र देश है। जब हमारा देश आजाद हुआ था उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री “पंडित जवाहरलाल नेहरू जी” ने कहा था, “राष्ट्रीय ध्वज सिर्फ हमारी स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि ये देश की समस्त जनता की स्वतंत्रता का प्रतीक है” संबिधान में मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज खादी के कपड़े का होना चाहिए, शुरुआती दौर में राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल आम नागरिकों द्वारा सिर्फ राष्ट्रीय दिवस जैसे स्वतंत्रता दिवस व गणतन्त्र दिवस को ही होता था, बाकि से समय में उसको नहीं फहराया जाता था। यूनियन कैबिनेट ने इसमें बदलाव किया और आम नागरिकों द्वारा इसके उपयोग को शुरू कर दिया गया।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भारतीय लोग कई नामों से जानतें है जैसे – तिरंगा, देश का झंडा तिरंगा, जिसका मतलब होता है तीन रंग का झंडा। तीन रंग.जिसमे तीनों कलर समतलीय एक बराबर हिस्सों में बटे हुए होते है, सबसे ऊपर केसरिया, उसके नीचे सफ़ेद व सबसे नीचे हरा रंग होता है. तिरंगे की चोडाई व् लम्बाई का अनुपात 2:3 होता है। तिरंगा के बीच में सफ़ेद रंग के उपर नीले रंग का अशोक चक्र होता है, जिसमें 24 धारियां होती है।

तिरंगे के तीन रंगों का विस्तार से विवरण – (National Flag Colors)

  1. केसरिया
  2. सफ़ेद
  3. हरा
  • केसरिया रंग तिरंगे में सबसे ऊपर भाग में होता है। यह साहस, निस्वार्थता व शक्ति का प्रतीक है।
  • तिरंगे में सफ़ेद रंग सच्चाई, शांति व पवित्रता का प्रतीक है. यह रंग देश में सुख शांति की उपयोगिता को दर्शाता है।
  • हरा रंग विश्वास, शिष्टता, वृद्धि व हरी भरी भूमि की उर्वरता का प्रतीक है. यह सम्रधि व जीवन को दर्शाता है।

अशोक चक्र – इसको धर्म चक्र भी कहा जाता है, नीले रंग का अशोक चक्र तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था, जिसे तिरगे की बीच में लगाया जाता है। इसमें 24 धारियां होती है. अशोक चक्र जीवन के गतिशील होने को दर्शाता है, इसका न होना मतलब म्रत्यु है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास (Indian National Flag History) –

  • स्वतंत्रा पाने के लिए भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय जनता को बहुत से संघर्ष करने पड़े उसके बाद हमको स्वतंत्रा मिली। झंडा हमारे भारत के गणतंत्र का प्रतीक है, देश आजाद होने के कुछ दिन पूर्व 22 जुलाई 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान को लेकर एक सभा आयोजित की गई थी, जहाँ पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को सबके सामने प्रस्तुत किया गया. इसके बाद 15 August 1947 से 26 Jan 1950 तक राष्ट्रीय ध्वज को भारत के अधिराज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया, सन 1950 में संविधान लागु होने पर इसे स्वतंत्र गणतंत्र का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया, राष्ट्रीय ध्वज को “पिंगली वेंक्क्या” द्वारा बनाया गया था।
  • 1904-06 – भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास आजादी के पहले से जुड़ा हुआ है, 1904 -06 के आस पास पहली बार राष्ट्रीय ध्वज लोगो के सामने आया था, उस समय इसे स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या सिस्टर निवेदिता ने बनाया था, 1906 सिस्टर निवेदिता की रचना के बाद 1906 में एक बार फिर नए ध्वज का निर्माण हुआ, बाद में आगे चलकर इसमें बदलाव किया गया और इसमें तीन कलर केसरिया, पीला व हरा रंग रखा गया, जिसे कलकत्ता ध्वज के नाम से जाना जाने लगा। इस ध्वज को 7 अगस्त 1906 में कलकत्ता के पारसी बागन चौराहे पर सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी द्वारा फ़हराया गया था, उस समय बंगाल का विभाजन हुआ था, उसी के विरोध में ये प्रदर्शन किया गया था।
  • 1907 में इसमें मैडम भिकाजी कामा, विनायक दामोदर सावरकर व् श्यामजी कृष्णा वर्मा द्वारा फिर बदलाव किये गए।
  • 1916 में पिंगली वेंकय्या नाम की लेखिका ने एक ध्वज बनाया, जिसमें पुरे देश को साथ लेकर चलने की उनकी सोच साफ झलक रही थी. वे महात्मा गाँधी से भी मिली और उनकी राय ली. गांधीजी ने उनको उसमें चरखा भी जोड़ने की बात कही।
  • 1917 में बाल गंगाधर तिलक ने नए ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।
  • 1921, महात्मा गाँधी चाहते थे कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज में देश की एक जुटता साफ साफ झलके, इस वजह से एक ध्वज का निर्माण किया गया. इस ध्वज में भी 3 रंग थे।
  • 1931 ध्वज में साम्प्रदायिक व्याख्या से कुछ लोग बहुत नाराज थे. इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए ध्वज में लाल रंग को गेरू कर दिया गया।
  • 1947 में जब देश आजाद हुआ, उस समय प्रथम राष्ट्रपति व कमिटी प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में बात करने के लिए एक सभा बुलाई, वहीँ पर सभी एक मत होकर कांग्रेस से उनका ध्वज लेने की बात मानी, 1931 में बनाये गए उस ध्वज में बदलाव के साथ उसे अपनाया गया. बीच में चरखे की जगह अशोक चक्र ने ली, इस प्रकार अपने देश का राष्ट्रीय ध्वज तैयार हो गया।

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ध्वज का निर्माण कार्य – ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैण्डर्ड (BIS) ने ध्वज के निर्माण के लिए मानक सेट किया, जैसे उसका कपड़ा, धागा, रंग उसका अनुपात सब कुछ रुल के अनुसार सेट किया, यहाँ तक कि उसके फेहराने से जुड़ी बातें भी रुल में लिखी गई।

  • जब तिरंगे को उठाया जाए तो हमेशा ध्यान रखें केसरिया रंग सबसे उपर हो।
  • कोई भी ध्वज या प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज के उपर नहीं होना चाहिए।
  • अगर कोई और ध्वज फेहराये जा रहे है, तो वे हमेशा इसके बायीं ओर पंक्ति में फेहराये।
  • अगर कोई जुलुस या परेड निकल रही हो, तो राष्ट्रीय ध्वज दाहिने ओर होना चाहिए।
  • राष्ट्रीय ध्वज हमेशा मुख्य सरकारी ईमारत व् संस्थान जैसे राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट आदि में ही फहराया जाना चाहिए ख़ुशी से लोग अपने घर पर भी फहरा सकते है।
  • राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग किसी भी पर्सनल व्यवसाय या काम के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता है।
  • राष्ट्रीय ध्वज शाम को सूर्यास्त के समय उतार देना चाहिए।

National Flag के बारे में रोचक तथ्य – (Essay on National Flag in Hindi)

  • राष्ट्रीय ध्वज को 29 May 1953 को में दुनिया के सबसे उचें पर्वत माउंट एवेरेस्ट पर फ़हराया गया था।
  • मैडम भीखाजी खामा पहली इन्सान है, जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को विदेशी जमीन पर फ़हराया था।
  • 1984 में अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा द्वारा इसे अंतरीक्ष पर फ़हराया गया।
  • Dec 2014 में चेन्नई में 50 हजार लोगो ने राष्ट्रीय ध्वज बनाकर एक रिकॉर्ड कायम किया था।
  • Delhi के Central Park में सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज फ़हराया गया, जिसकी लम्बाई 90 फीट व् चोड़ाई 60 फीट थी।

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